“अयोध्या चालीसा” रानी सोनी “चंदा” जी की शानदार कविता एक बार अवश्य पढे ।

 अयोध्या चालीसा
 

 

 

राम जगत में है कहां, मांग रहे प्रमाण।
दोनो कर को जोड़ कर, करूं उन्हें प्रणाम।
जितना गिराया था हमे, उतना उड़े आकाश।
राम नाम का सूर्य उगा, छाया जग प्रकाश।
मुगलों ने आतंक फैलाया। राम लला का मंदिर ढाया।१
दो धर्मो की हुई लड़ाई। फिरंगियो ने करी कड़ाई।।२
विवादित भूमि को था बांटा। राम भक्तो पर था यह चांटा।।३
तारों की फिर बाड़ लगाई। ये नीति हमें समझ न आई।।४
जन्मभूमि को कैसे छोड़े। हाथ पांव भी अब नहि जोड़े।।५
करना है कुछ पृथक निवारण। राम नाम का हो उच्चारण।।६
बेगी दिखाओ प्रभु उपाई। बेघर मूरत देखी नहि जाई।।७
आए महॅंत रघुबीर दासा। मांगी भूमि मंदिर पासा।।८
राम चबूतरा बना अस्थाई। पूजन करने की भई लड़ाई।।९
स्वतंत्रता का शुरु आंदोलन। न्यौछावर सब करते तन मन।।१०
परिसर स्थित इक चबूतरा। प्रथम प्रमाण यह श्री हरि का।।११
गुंबद नीचे मूर्ति पाई। जिसने आशा ज्योत जलाई।।१२
राम लला को महल मिलेगा। भारत भगवा रंग खिलेगा।।१३
गांव गांव हुई पूजन शीला। विरोधियों का किला हीला।।१४
शिलान्यास की अनुमति पाई। आयेंगे राम अब रघुराई।।१५
रथ यात्रा से किया आंदोलन। संग सकल कार सेवक जन।।१६
विवादित ढांचा दिया गिराई। बहु घायल बहु जान गवाई।।१७
हुआ अवध में कर्फ्यू जारी। सेवक करे पृथक तैयारी।।१८
कह मंदिर भूखे भगवाना। प्रसाद खिलाने हमे जाना।।१९
दर्शन पूजन अनुमति पाई। प्रसन्न भक्त प्रसन्न रघुराईं।।२०
करें खुदाई आदेश आया। यह प्रस्ताव मन अति भाया।२१
राम लला सुन्नी निर्मोही। समान की वार्ता नहि सोही।।२२
तीन बराबर अनुमति होई। यहां सहमति करे नहि कोई।।२३
कई दशक तक हुई लड़ाई। दर पर न्यायालय के आई।।२४
न्यायालय मांगे परमाणा। राम दूत बन आए प्राणा।।२५
जय हो श्री गुरु रामभद्रचार्या। पूर्ण किए प्रभु राम कार्या।।२६
चतुर शतक से अधिक प्रमाणा। राम भूमि आया परिणामा।।२७
राम ही राम चहुं दिशा में। दिन पूरा अरु घोर निशा में।।२८
राम बिना तो जग अंधियारा। राम नाम से मन उजियारा।२९
आधारशिला की तैयारी। जन मानस प्रसन्नता भारी।।३०
राम मूरत सजीव बनाना। आया अवसर बड़ा सुहाना।।३१
जनकपुर से उपहार आया। राम ससुराल उत्सव छाया।।३२
बजरंगबली के दूत पधारे। वनवासी यह साथी सारे।।३३
गिद्धराज का कुटुंब आया। जिसको जग में विलुप्त पाया।३४
जामवंत जी कहां थे पीछे। आए इस अवसर आंखे मिचे।।३५
ननिहाल से आए उपहारा। मिलन समारोह सब परिवारा।।३६
पुष्पक विमान रूप निराला। अयोध्या नगरी रूप विशाला।।३७
सनातन धर्म का जयकारा। गाता जाएं भारत सारा।।३८
राम दूत इक आया ऐसा। जिसका कारज बना विशेषा।। ३९
अंबर से होगी पुष्पवर्षा। इस दिन को भारत वासी हर्षा।।४०
चंदा के मन प्रेम का,बरस रहा अंबार।
राम प्रभु के चरण में,वंदन बारंबार।।

 

रानी सोनी “चंदा”

 
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