कविता सहूलियत….लोग अक्सर अपनी सहूलियत से बदल जाते है ।

रिश्ते कितने भी ख़ास हो,
लोग अक्सर …
अपनी सहूलियत से बदल जाते है।

कोई अपनी अस्तित्व के अंत तक
मोहब्बत पे कुर्बान है…
फिर भी मेहबूब 
अपनी सहूलियत   से बदल जाते है ।

कौन कितना और कब तक 
साथ निभाएगा यें तो वक़्त बताएगा,
होना है जो वो तो हो कर रहेगा,
फिर भी लोग यहाँ 
अपनी सहूलियत से बदल जाते है ।

लोग यहाँ परिस्थितियों के साथ 
अक्सर ढल जाते है,
परवाह नहीं किसी को किसी की
 क्यूंकि, लोग यहाँ अक्सर ..
अपनी सहूलियत से बदल जाते है  ।

आज के दौर मे आजमाइशों का फेरा है
हर शख्स  का यहाँ दोहरा चेहरा है..
परिस्थितियाँ कुछ  भी हो जिनको साथ देना हो
  वो हर हाल मे देते है साथ
वरना बदलने वाले लोग 
अपनी सहूलियत से बदल जाते है. ।।

कुमारी किर्ती अमृता आशा
                   मुंगेर, बिहार

3 thoughts on “कविता सहूलियत….लोग अक्सर अपनी सहूलियत से बदल जाते है ।”

  1. वक्त के साथ धीरे धीरे सब बदल जाते है ।
    अपने बहुत अच्छा लिखा है …
    लिखना जारी रखे 😊

  2. आज की सच्चाई दिखती कविता….
    लोगो को बदलते देर नहीं लगता बिलकुल sahi

  3. Yes, apselutely right people can change according to time …in today's world two faces people are like mirror , reflecting back what other want to see …well done buddy 😊😊

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