गौतम शेन्डे जी की दिल छू जाने वाली कुछ रचनाएं

काश , सवर जाता मैं समय पर…


काश ,   सवर जाता मैं समय पर ,

इतना तमाशा नहीं  बनता  जिंदगी का,
खामोश  रहकर  .. 
खुद की  हिफ़ाजत  करता ,
खुद पर यकीन करके ,
अपनी  मन्जिल  की ओर बढ़ता ,
दिन रात खून पसीना एक करके,
अपने सपने मुट्ठी में कर लेता .. 
हाँ ….
यह बात सच है कि ,
आसान नहीं होते कुछ हालात ,
पर वक्त निकाल कर    
अपनी खवाइशों  को 
काबू मे कर लेता ,
बहुत से हादसे सहे है जिंदगी में .. 
पर यह हादसा जानलेवा था ,
कुल्हाड़ी पर पाँव रख कर 
खुद  को जलील नहीं करता , 
इतना तमाशा नहीं  बनता  जिंदगी का ,
काश ,   सवर जाता मैं समय पर ,

कुछ रचनाएं 

कुछ रचनाएं .. 
वाकई बहुत खूबसूरत होती है 
कुछ रचनाएं..  ,
एक खूबसूरत लड़की के 
खूबसूरत चेहरे की तरह,
इसमें अल्फ़ाज़ भी होते है ,
और जज़्बात भी ,
इसमें सादगी भी होती है 
और मदहोशी भी ,
इसमें कोशिश भी होती है 
और अपनापन भी ,
इसमें फितरत भी होती है 
और मुलाकात भी ,
इसमें सहारा भी होता है 
और सुकून भी ,
सच  में कुछ  रचनाएं 
बड़ी खूबसूरत होती हैं । 

दुनिया ने ठुकराया 

दुनिया ने ठुकराया 
 बदनसीब हूँ मैं ,
लोग कहते हैं
बड़ा अजीब हूँ मैं।
हाँ, यह सच है,मैं उनकी 
हाँ में हाँ नहीं मिलाता ,
अपने उसूलों और अपने 
दम पर चलता हूं ।
उनके साथ
चिकनी- चुपडी बातें
नहीं करता,
चापलुसियाँ तो
दूर की बात है,
सच को सच
और झूठ को झूठ
बोलने का साहसे रखता हूँ।
व्यवहार के करीब हूं मैं, 
पर लोग कहते हैं
बड़ा रक़ीब हूँ मैं।

लेखक –  गौतम   शेन्डे 

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