बलात्कार… दुष्कर्म. दिनेश कुमार पांडेय (बीनू) जी की दिल छू जाने वाली कविता

 

 

फट रही है धरती.. पापियों तुम्हारे पाप से 
मां की योनि दुस्कृत हुई  दुस्कृतियों जैसे लाल से…

पैदा वेश इंसान में हुआ था.. 
कृत्य जानवर से भी बदतर कर गया 
सींचा जिसे अपने रक्त रूपी दुग्ध 
पिला के एक मां के प्यार ने…

कर जायेगा ऐसा कृत्य..
जन्मते वक्त मां ने भी न सोच होगा कभी
कि झुक जायेगा शर्म से सर उसका
ऐसा योनिजा उत्पन्न लाल से…

जिस वक्त देखा होगा निगाह गन्दी कर 
उस निर्वस्त्र यौवना के वक्ष और गुप्तांग को… 
घृणित हो फूट गई होंगी आँख उसके मात के 
और जीते जी मर गई होगी उसकी बेचारी मां 
जब योनि दुस्कृत हुई होगी उसकी उसके लाल से..।।
 
लेखक  :- दिनेश  कुमार पांडेय (बीनू)

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