मैं हार जाऊँगी ये कैसे मान लिया तुमने कुमारी किर्ती अमृता आशा

तकलीफों का है सैलाब अगर जिंदगी में  
तो क्या हुआ मैं हार जाऊँगी 
कैसे मान लिया तुमने ..

मेरे हौसलें , मेरे जूनन 
कुछ कर गुजरने की चाहत ,
मेरे खवाइशों का सैलाब ,
मेरे साथ ही तो है । 

माना की भीड़ से पीछे हूँ मैं ,पर 
आगे नहीं बढ़ पाऊँगी कभी 
ये कैसे सोच लिया तुमने । 

गिर भी गयी अगर मैं,
उठूँगी फिर लड़ूँगी 
हार मेरे हिस्से मे आए 
ये मंजूर नहीं मुझे …
और बिन लड़ें ही हार जाऊँगी 
ये कैसे सोच लिया तुमने । 

जिंदगी की सारी बाधाओं को पार कर
एक दिन मैं भी सफल हो जाऊँगी ,
ये मेरा वादा है खुद से ..

माना की रात घनी अंधेरी है ,पर 
आने वाला कल भी मेरा अंधकारमय होगा 
ये कैसे सोच लिया तुमने .।  

मैं खुद में ही एक रोशनी की मिशाल हूँ 
थोड़ी सी है उलझने जिंदगी में ,
बस इसलिए आज कल परेशान हूँ । 

ना हार मानूगीं , ना पीछे हटूँगी , ना डरूँगी 
मैं एक बार नहीं सौ बार गिरूँगी ,
चेहरे   पर रख  एक प्यारी सी मुस्कान 
हर बार उठूँगी और फिर एक बार लड़ूँगी । 
पा लूँगी हर एक मंजिल को ,
जो मेरे अस्तित्व की पहचान बनेगी .। 

कुमारी किर्ती अमृता आशा
 जमालपुर,(मुंगेर ) 
बिहार

4 thoughts on “मैं हार जाऊँगी ये कैसे मान लिया तुमने कुमारी किर्ती अमृता आशा”

  1. Superb 😊😊yes,mindset is the biggest weapon that you to found each and every success ….people should never more think about past and do not more dream about her future only he should concentrate on present ..so ,nice that you write
    …❤️

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