वो नासमझ बेटियां कुछ तो सोचा होता कुमारी किर्ती अमृता आशा… Hindi Writer

 

 

बाप की पगड़ी उछली होंगी..
जब उस बाप की बेटी ने परिवार से पहले
अपने प्रेमी को चुना होगा..
उस भाई का गुरुर टुटा होगा
ज़ब उसकी बहन ने उसको  झूठा कहा होगा..
जाने क्या बीती होंगी उस भाई पे,
जब उस के यार दोस्तों ने भी उसे तानो से लुटा होगा..
 
माना की प्यार गुनाह नहीं,
फिर कैसे तू ये भूल गयी
उस बाप के प्यार को जिसने तुझको वर्षो तक
नाजों से पाला होगा..
उस माँ की ममता को
जिसने तुझको अपने हिस्से का भी
निवाला खिलाया होगा ..
उस भाई की दुलार को जिसने
तुझको हर पीड़ा से बचाया..

कहते है बेटियां घर की लक्ष्मी होती है,
कुछ तो सोचा होता 
घर से रुपये पैसे गहने चुराते हुए..
माँ बाप भाई के सपनो को जलाते हुए..

याद रखना तू भी इस बात को,
माना की सब यार बेवफा नहीं होते,पर
सब वफादार भी तो नहीं होते..
छोड़ देगा ज़ब वो तेरा साथ,
तो क्या कभी सोचा है तूने..
 किस मुँह से जाएगी उस भाई के पास
जिसका गुरुर कभी तूने तोड़ा होगा…

मान ले एक पल को माँ बाप तुझको अपनायेगे..
तो क्या वो तेरा किया भूल पाएंगे…
क्या वो भूल पाएंगे ..
अपने बेटे के रोते चेहरे को..
जिसको  सामाज ने दिए होंगे 
तेरे भाग जाने के बाद घाव गहरे वो..
कभी सोचना भाई की सुनी कलाई को..
तेरे जाने के बाद वर्षो वो रखी को तरसा होगा..
भूल गया होगा वो करना भरोसा अपनों पे..
जब हर राह , हर मोड़ पर
सामाज़ के ताने उस पे बरसे होंगे..

तू तो चली जाएगी,
अपने प्यार के  संग ज़िन्दगी बितायेगी..पर
ये ना भूल एक भागी हुई लड़की.. संग ले जाती है
कई लड़कियों के सपने, आगे बढ़ने की ख्वाब
भाई की उम्मीद और बाकि लड़कियों की पढ़ने का जूनून..
क्या कोई माँ बाप भाई
किसी बेटी पे भरोसा कर पाएंगे..
जिसको उसकी बेटी ने तोड़ा होगा..

कुमारी किर्ती अमृता आशा…
जमालपुर (मुंगेर ) 
बिहार

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